
कवर्धा/कबीरधाम जिले में प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भोरमदेव जंगल सफारी के निमंत्रण पत्र से जनप्रतिनिधियों के नाम हटाए जाने पर अब मामला तूल पकड़ चुका है। इसे लेकर कलेक्टर और डीएफओ को सीधे 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया गया है। चेतावनी साफ है—यदि तय समय में स्पष्टीकरण और कार्रवाई नहीं हुई, तो पंडरिया की सड़कों पर जनआक्रोश फूट पड़ेगा।

भोरमदेव जंगल सफारी जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के निमंत्रण से पंडरिया विधायक भावना बोहरा , मुख्यमंत्री और जिला अध्यक्ष का नाम गायब होना अब सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर प्रोटोकॉल उल्लंघन माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल नाम हटाने का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का सीधा अपमान है। इसे विशेषाधिकार हनन का गंभीर मामला बताया जा रहा है।

नाम हटाने से जनप्रतिनिधियों का कद कम नहीं होता, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही जरूर कटघरे में खड़ी होती है।
मामले में अब सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को 24 घंटे के भीतर जवाब देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। साफ कहा गया है कि यदि समयसीमा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पंडरिया में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है—सफाई देता है या कार्रवाई करता है, क्योंकि इस बार मामला सीधे जनभावनाओं से जुड़ गया है।



