कवर्धाछत्तीसगढ़

अदालत के फैसले का सम्मान, लेकिन झीरम के राजनीतिक षड्यंत्र का सच सामने आना बाकी : नवीन जायसवाल

अदालत के फैसले का सम्मान, लेकिन झीरम के राजनीतिक षड्यंत्र का सच सामने आना बाकी : नवीन जायसवाल

कवर्धा/ 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भीषण राजनीतिक नरसंहारों में से एक झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आधा-अधूरा न्याय बताया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन झीरम नरसंहार के पीछे छिपे राजनीतिक षड्यंत्र और बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका का सच आज भी सामने नहीं आया है।

जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 लोगों की हत्या हुई थी। एनआईए कोर्ट का फैसला आया है, लेकिन यह फैसला उन तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित है जो जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला अपनी जगह है, लेकिन जांच की दिशा और उसके अधूरे पहलुओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।

नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वाले केवल छोटे स्तर के नक्सली ही थे या इसके पीछे बड़े नक्सली नेतृत्व की भी भूमिका थी?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी? यात्रा का मार्ग किसके कहने पर और क्यों बदला गया? हमले की योजना किसने बनाई? इन सवालों के जवाब आज भी जनता के सामने नहीं हैं।

नवीन जायसवाल ने कहा कि एनआईए की शुरुआती कार्रवाई में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, बाद की कार्रवाई में उनके नाम हटने को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव और रमन्ना सहित अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद बाद की चार्जशीट में उनके नाम क्यों नहीं रहे?

उन्होंने कहा कि अगस्त 2014 तक जिन नामों का उल्लेख था, सितंबर 2014 में प्रारंभिक एवं अंतिम चार्जशीट में उन नामों के हटने का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए की शुरुआती जांच में झीरम घटना से जुड़े बताए गए देवा उर्फ सुक्का एलियास देवा को वांछित घोषित किया गया था और उस पर इनाम भी था, तो बाद में उससे पूछताछ क्यों नहीं हुई?

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए द्वारा नामजद और फरार घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ऐसे में उनसे झीरम हत्याकांड के संबंध में पूछताछ हुई या नहीं, यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

नवीन जायसवाल ने कहा कि झीरम हमले में घायल होकर जीवित बचे लोगों के बयान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होने चाहिए थे। कांग्रेस का आरोप है कि कई प्रभावित लोग जांच एजेंसियों के समक्ष शपथपत्र सहित उपस्थित हुए, लेकिन उनके बयानों को जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया।

उन्होंने सवाल किया कि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों में से कितने लोगों से एनआईए ने पूछताछ की? घटनास्थल पर शहीदों एवं घायलों के पर्स, फाइलें और महत्वपूर्ण दस्तावेज लंबे समय तक पड़े रहने तथा मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने जैसी बातों की जांच किस स्तर तक हुई?

उन्होंने यह भी पूछा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित एसआईटी को एनआईए ने जांच से क्यों रोका? तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और एडीजी नक्सल से एनआईए ने कब और कितनी बार पूछताछ की, इसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

पूर्व विधायक ममता चंद्राकर ने कहा कि झीरम घाटी हत्याकांड से जुड़े बताए गए और अलग-अलग समय पर पुलिस एवं सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से जांच एजेंसियों द्वारा झीरम मामले में पूछताछ की गई या नहीं यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय समय पर आत्मसमर्पण करने वाले ऐसे नक्सलियों में चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी और निर्मला उर्फ सुमित्रा जैसे नामों का उल्लेख सामने आया है। यदि ये लोग झीरम घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाले थे तो उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई? यदि पूछताछ हुई, तो उसके निष्कर्ष क्या रहे?

ममता चंद्राकर ने कहा कि झीरम जैसे बड़े नरसंहार की पूरी साजिश का पर्दाफाश केवल कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। घटना के पीछे किस स्तर पर योजना बनी किसने आदेश दिया और किन लोगों ने इसे अंजाम दिया इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी ने कहा कि समय-समय पर कई बड़े नक्सली नेताओं और कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने भूपति उर्फ सोनू दादा तथा केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता के आत्मसमर्पण का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि ऐसे बड़े नक्सली नेताओं से झीरम हत्याकांड के संबंध में जांच एजेंसियों ने पूछताछ की या नहीं?

उन्होंने कहा कि यदि इन लोगों के पास झीरम घटना से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जानकारी थी तो उन्हें जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया गया? क्या उन्हें झीरम मामले में निर्दोष मान लिया गया है? यदि हां, तो किस आधार पर?

रवि चंद्रवंशी ने कहा कि झीरम हत्याकांड में न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा जब घटना में शामिल हर स्तर के व्यक्ति और पूरे षड्यंत्र का सच सामने आए।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि झीरम मामले में भाजपा की तत्कालीन सरकार की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी गठित किए जाने के बाद जांच को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ और जांच आगे बढ़ने में बाधाएं आईं।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक द्वारा न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लिए जाने से लेकर एसआईटी की जांच पर कानूनी अड़चनों तक, झीरम की सच्चाई सामने आने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच के रास्ते को स्पष्ट किए जाने के बावजूद राज्य की भाजपा सरकार ने लंबे समय तक जांच आगे नहीं बढ़ाई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ढाई साल तक एसआईटी जांच शुरू नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ पूर्वाग्रह से कार्रवाई की मांग नहीं कर रही है, बल्कि झीरम हत्याकांड की निष्पक्ष, पारदर्शी और संपूर्ण जांच की मांग कर रही है।

कांग्रेस के प्रमुख सवाल

– कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी?

– यात्रा का मार्ग किसके निर्देश पर और क्यों बदला गया?

– हमले की पूरी योजना किसने बनाई थी?

– बड़े नक्सली नेताओं के नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटाए गए?

– आत्मसमर्पण करने वाले बड़े नक्सली नेताओं से झीरम मामले में पूछताछ हुई या नहीं?

घायल एवं प्रत्यक्षदर्शियों के सभी बयान जांच में शामिल क्यों नहीं किए गए?

– तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस अधिकारियों से एनआईए ने कब पूछताछ की?

– एसआईटी की जांच को आगे बढ़ने से क्यों रोका गया?

– झीरम हमले के पीछे राजनीतिक षड्यंत्र था या नहीं, इसकी जांच क्यों पूरी नहीं हुई?

जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम ने कहा कि झीरम केवल एक हत्याकांड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोकतंत्र पर हुआ हमला था। कांग्रेस के 32 नेताओं और कार्यकर्ताओं की शहादत का पूर्ण न्याय तभी होगा, जब हत्याकांड के पीछे की पूरी साजिश, साजिशकर्ताओं और घटना के वास्तविक सूत्रधारों का सच देश और प्रदेश की जनता के सामने आए।

कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन झीरम के पूरे सच की लड़ाई जारी रहेगी।

Nohar Das Manikpuri

Founder/Editor

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button