कवर्धाछत्तीसगढ़

डरावनी थीम वाली गुफा और विशाल प्रतिमा बनी आस्था का केन्द्र

बच्चियों और महिलाओं में गुफा प्रवेश का डर अधिक,अन्य जिले से भी आ रहे श्रद्धालु 

डरावनी थीम वाली गुफा और विशाल प्रतिमा बनी आस्था का केन्द्र

बच्चियों और महिलाओं में गुफा प्रवेश का डर अधिक,अन्य जिले से भी आ रहे श्रद्धालु 

कवर्धा/ शारदीय नवरात्र पर इस बार कवर्धा शहर भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम का गवाह बना हुआ है। राजमहल कॉलोनी डड़सेना भवन स्थित आदर्श विद्या मंदिर के पास नवदुर्गा उत्सव समिति द्वारा इस वर्ष ऐसा आकर्षण तैयार किया गया है, जिसने न केवल जिले बल्कि पूरे अंचल में उत्साह का माहौल बना दिया है। समिति ने मां वैष्णव देवी मंदिर की तर्ज पर भव्य एवं डरावनी थीम वाली गुफा का निर्माण किया है, जिसकी अद्वितीय सजावट और रहस्यमयी वातावरण भक्तों के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव का केन्द्र बन गया है।

4 से 5 हजार श्रद्धालु कर रहे प्रतिदिन दर्शन

समिति के अनुसार इस गुफा को देखने और माता के दर्शन के लिए प्रतिदिन करीब 4 से 5 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। न केवल कवर्धा शहर, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर माता रानी का आशीर्वाद ले रहे हैं। गुफा की अनोखी सजावट, भव्य प्रतिमाएं और रोशनी से सजे रहस्यमयी गलियारे हर आगंतुक को दिव्यता और रोमांच का अद्भुत अहसास कराते हैं।

14 फीट की भव्य प्रतिमा मुख्य आकर्षण

पंडाल में स्थापित 14 फीट ऊंची मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को आस्था और भव्यता का अनुपम अनुभव करा रही है। गुफा के भीतर देवी–देवताओं की सुंदर मूर्तियां और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत कराती है मानो वे किसी अद्भुत देवी धाम में पहुंच गए हों।

5 महीने की है तैयारी, 6 बजे खुलती है गुफा 

समिति के सदस्य गुड्डू, बंटी, सतीश, मनु सहित अन्य ने बताया कि इस अनोखी गुफा की तैयारियां लगभग पांच महीने पहले से शुरू की गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए आने वाले वर्ष में इससे भी अधिक भव्य गुफा बनाने की योजना है। फिलहाल गुफा प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 11.30 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहती है।

अष्टमी पर भव्य भंडारा, विसर्जन पर कलश यात्रा और महाआरती

नवरात्रि की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समिति द्वारा अष्टमी पर भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा इस वर्ष विसर्जन कार्यक्रम को और खास बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। प्रत्येक वर्ष की तरह 151 मीटर चुनरी यात्रा की जगह इस बार दशहरे के दूसरे दिन कलश यात्रा एवं जोत-ज्वारा का आयोजन किया जाएगा।

इस प्रकार होगा विसर्जन का रूट 

यह यात्रा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निकलेगी, जिसका रूट माता रानी के विराजित स्थान से शुरू होकर भोजली तालाब–भारत माता चौक–बस स्टैंड तक जाएगा और फिर रिटर्न होकर भारत माता चौक पहुंचेगा। यहां जिले की सुख-समृद्धि और शांति के लिए भव्य महाआरती की जाएगी। इसके बाद यात्रा राजमहल चौक होते हुए सकरी नदी सेतु स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास पहुंचेगी, जहां माता रानी के विसर्जन का दिव्य कार्यक्रम सम्पन्न होगा।

आस्था और संस्कृति का संगम

नवदुर्गा उत्सव समिति का यह आयोजन न केवल कवर्धा जिले की धार्मिक आस्था को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर रहा है। डरावनी थीम, गुफा की भव्यता, विशाल प्रतिमा और अनूठी परंपराओं ने इस बार के नवरात्रि उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया है। श्रद्धालु इसे जीवन भर याद रहने वाला अनुभव बता रहे हैं।

Nohar Das Manikpuri

Founder/Editor

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