कवर्धाछत्तीसगढ़

कवर्धा के मां सिंहवाहिनी मंदिर में नौ देवियों का एक साथ दिव्य दर्शन

कवर्धा के मां सिंहवाहिनी मंदिर में नौ देवियों का एक साथ दिव्य दर्शन

कवर्धा। कवर्धा में शक्ति आराधना की परंपरा सदियों से चली आ रही है, और इसी आस्था का केंद्र है देवांगन पारा स्थित मां सिंहवाहिनी मंदिर। विख्यात खेड़ापति हनुमान मंदिर के समीप स्थित यह प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय है। मान्यता है कि यहां स्थापित दक्षिणाभिमुख मां सिंहवाहिनी की दिव्य प्रतिमा आदिकाल से स्वयंभू रूप में विराजमान है, जिनका प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी, अर्थात् श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन माना जाता है।

पौराणिक कथा और स्थापना

कथाओं के अनुसार, प्राचीनकाल में मंदिर स्थल पर एक पहाड़नुमा टीला था, जिस पर नीम का वृक्ष था। इसी वृक्ष के नीचे धीरे-धीरे देवी का प्राकट्य हुआ। समय के साथ पहाड़ धंसकर समतल हो गया और यहां एक छोटा सा मंदिर बना। रियासत काल में स्वर्गीय राजा यदुनाथ सिंह (1908–1920) ने पहला जीर्णोद्धार कराया, ताकि जवांरा ज्योति को पहाड़ से नीचे लाने में आने वाली कठिनाई दूर हो सके। इसके बाद तीन बार और पुनर्निर्माण हुआ और आज मंदिर भव्य स्वरूप ले चुका है।

नौ शक्तियों का संगम

मंदिर के गर्भगृह में मां सिंहवाहिनी की दक्षिणाभिमुख प्रतिमा स्थापित है, जिन्हें सात बहनों में सबसे बड़ी बहन माना जाता है। वामभाग में पश्चिमाभिमुख मां काली की प्रतिमा विराजमान हैं। गर्भगृह के बाहर क्रमशः मां दंतेश्वरी, मां विंध्यवासिनी, मां महामाया, मां चंडी, मां शीतला, मां दुर्गा और मां गंगई की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस प्रकार, एक ही स्थान पर नौ शक्तियों का दर्शन संभव होता है।

विशेष परंपराएं और मान्यताएं

बुजुर्गों के अनुसार, कवर्धा में खप्पर परंपरा की शुरुआत इसी मंदिर से हुई थी, जिसे बाद में इसकी उग्र ऊर्जा को देखते हुए रोक दिया गया। स्थानीय मान्यता है कि पंचमुखी बूढ़ा महादेव और मां सिंहवाहिनी मंदिर समकालीन हैं। मंदिर की विशेष परंपरा के अनुसार, यहां पूजा का कार्य केवल ठाकुर और क्षत्रिय समुदाय द्वारा किया जाता है, ब्राह्मण और बैरागी समुदाय नहीं।

मंदिर परिसर और वातावरण

मंदिर के प्रवेश द्वार पर दाईं ओर भैरव और बाईं ओर ठाकुर देव की प्रतिमा है। मंदिर के सामने विशाल वटवृक्ष और गस्ती की छांव तले भैरव बाबा का पवित्र स्थान स्थित है, जो श्रद्धालुओं को आस्था और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

मां सिंहवाहिनी मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी प्रतीक है। यहां आकर श्रद्धालु एक साथ नौ देवियों का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जो शायद ही कहीं और संभव हो।

Nohar Das Manikpuri

Founder/Editor

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