
मानदेय गबन की आशंका, स्वच्छता दीदियों ने CEO को सौंपा ज्ञापन
बोड़ला/ग्राम पंचायत मानिकपुर में स्वच्छता अभियान के तहत कार्यरत स्वच्छता दीदियों को 4 सितंबर 2024 से लगातार कार्य करने के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मानदेय नहीं दिया गया है। भुगतान न मिलने से नाराज महिलाओं ने अब स्वच्छता कार्य बंद कर दिया है, जिससे गांव की साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
स्वच्छता दीदियों का आरोप है कि मानदेय की राशि को लेकर पंचायत सचिव द्वारा लगातार टालमटोल किया जा रहा है। बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं, जिससे राशि गबन होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं का कहना है कि उन्हें जानबूझकर दर-दर भटकाया जा रहा है।
CEO को दिया गया आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं

सभी स्वच्छता दीदियों ने जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बोड़ला को लिखित आवेदन सौंपा है। इसके बावजूद अब तक न तो मानदेय का भुगतान हुआ है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई है, जिससे महिलाओं में भारी आक्रोश है।
मानदेय नहीं तो काम नहीं
लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण स्वच्छता दीदियों ने मजबूर होकर काम बंद कर दिया है। उनका कहना है कि बिना मेहनताना काम करना संभव नहीं है और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
अब कलेक्टर कार्यालय जाने की मजबूरी?
महिलाओं के सामने अब सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उन्हें उनका मानदेय मिल पाएगा? क्या जिम्मेदार पंचायत सचिव पर कार्रवाई होगी? या फिर न्याय के लिए उन्हें कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगानी पड़ेगी?
जांच नहीं हुई तो आंदोलन
इस पूरे मामले में जनता कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुनील केशरवानी ने कहा कि स्वच्छता दीदियों को दर-दर भटकने के लिए पंचायत सचिव जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि संबंधित पंचायत की जांच कराई जाए और स्वच्छता अभियान में लगी सभी दीदियों को तत्काल मानदेय का भुगतान किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान नहीं किया गया तो महिलाओं के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।





