
. मंच पर मंत्री, कटघरे में सिस्टम — भोरमदेव कॉरिडोर की सियासी गूंज, मंत्री के एक वाक्य से हिल गया कवर्धा — क्या कुछ गड़बड़ है?
कवर्धा के भोरमदेव में 146 करोड़ रुपये के भोरमदेव कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। मंच सजा, कैमरे चले और विकास के सपनों पर फूल बरसाए गए। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच केंद्रीय पर्यटन मंत्री का एक वाक्य ऐसा रहा, जिसने पूरे आयोजन के मायने बदल दिए।
मंत्री ने कहा —
“स्वदेश दर्शन योजना के तहत हो रहे 146 करोड़ के निर्माण की सही तरीके से जिम्मेदारी आप स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की है।”
अब सवाल ये है कि
👉 जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है, तो चेतावनी की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
कवर्धा में पिछले कुछ समय से निर्माण कार्यों को लेकर जो आरोप लग रहे हैं, वो किसी से छुपे नहीं हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि जिले में विकास के नाम पर सीमेंट से ज़्यादा कमीशन बह रहा है। सोशल मीडिया पर पुल, सड़क, नाली और भवनों की तस्वीरें वायरल होती रहीं, जिनमें निर्माण से ज़्यादा भ्रष्टाचार की दरारें दिखाई देती हैं।

ऐसे में जब दिल्ली से आए मंत्री मंच से ही स्थानीय नेताओं और अधिकारियों को “जवाबदारी” का पाठ पढ़ा जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है —
❓ क्या ये भाषण था या चेतावनी?
❓ क्या ये भरोसा था या संदेह का सार्वजनिक इशारा?
भोरमदेव कॉरिडोर 146 करोड़ का है, लेकिन उससे बड़ा सवाल भरोसे का है। अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक हो रहा होता, तो मंत्री को यह याद दिलाने की ज़रूरत क्यों पड़ती कि निर्माण सही होना चाहिए?
कवर्धा में चर्चा अब कॉरिडोर की सुंदरता की नहीं, बल्कि नेता–अधिकारी–ठेकेदार की ‘त्रिमूर्ति’ की हो रही है, जिस पर विपक्ष लगातार घटिया निर्माण के आरोप लगा रहा है।
कहा जा रहा है कि विकास योजनाएँ ज़मीन पर उतरने से पहले ही “काग़ज़ों में थक जाती हैं” और गुणवत्ता रास्ते में ही दम तोड़ देती है।
केंद्रीय मंत्री का बयान शायद एक औपचारिक वक्तव्य था,लेकिन कवर्धा की जनता इसे 👉 “सीधी बात, बिना नाम लिए” समझ रही है।
पर सवाल ये है —
क्या अब जवाबदेही का रास्ता भी बनेगा?
या फिर हर बार की तरह उद्घाटन के फीते कटेंगे,फोटो खिंचेंगी,और सवालों पर फिर से
मिट्टी डाल दिया जाएगा?






